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जिजुह्यांग यतामानसी
Valeriana jatamansii
वैलेरियाना जटामानसी एक बारहमासी पौधा है जो मुख्य रूप से एशिया के पर्वतीय क्षेत्रों में उगता है। निम्नलिखित जानकारी इस पौधे की वृद्धि विशेषताओं, प्रसार विधियों, खेती विधियों, बागवानी में उपयोग और महत्वपूर्ण कीटों, रोगों तथा नियंत्रण विधियों के बारे में है। वृद्धि विशेषताएँ - वातावरण: यह ठंडे, नम वातावरण में पनपता है और आंशिक छाया में अच्छी तरह बढ़ता है। - मिट्टी: इसे उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद है। प्रसार विधियाँ - बीज: इसे बीजों द्वारा उगाया जा सकता है; वसंत या शरद ऋतु में बीज बोना अनुशंसित है। - जड़ विभाजन: इसे वसंत या शरद ऋतु में जड़ों को विभाजित करके भी उगाया जा सकता है। खेती विधियाँ - स्थान का चयन: आंशिक छाया वाला ठंडा स्थान चुनें। - मिट्टी की तैयारी: उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करें। - रोपण: उचित समय पर बीज बोएं या जड़ों को विभाजित करें। - सिंचाई: पर्याप्त नमी बनाए रखें, लेकिन अधिक पानी देने से बचें। बागवानी में उपयोग - सजावटी: अपने सुंदर पत्तों और फूलों के कारण यह बगीचों या क्यारियों को सजाने के लिए उपयुक्त है। - औषधीय: परंपरागत रूप से औषधीय उपयोग में होने के साथ-साथ, इसका मुख्य उपयोग बगीचों में सजावटी पौधे के रूप में किया जाता है। महत्वपूर्ण कीट और नियंत्रण विधियाँ - रोग: जड़ सड़न और फफूंद रोगों से सावधान रहें। उचित जल निकासी और हवादार व्यवस्था से इन्हें रोका जा सकता है। - कीट: सामान्य कीटों से बचाव के लिए नियमित निगरानी और नियंत्रण आवश्यक है। - नियंत्रण विधियाँ: पर्यावरण के अनुकूल नियंत्रण के लिए प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है। गंभीर मामलों में रासायनिक नियंत्रण आवश्यक हो सकता है, लेकिन बागवानी के लिए जहाँ तक संभव हो प्राकृतिक नियंत्रण की सलाह दी जाती है। हमें आशा है कि इस जानकारी के आधार पर आप अपने जिजुश्यांग यतमांशी को स्वस्थ रूप से उगा और प्रबंधित कर सकेंगे।
Plant Type
Plant Family
वैलेरियन परिवार
Height
14~45cm
Spread
Colors
सफेद, गुलाबी
Bloom Period
मार्च से अप्रैल तक
Water Needs
आमतौर
Exposure
धूप वाला
Freezing Resistance
-10°C
यहां तक कि चूहे के मूत्र का पौधा भी
Valeriana amurensis
पेंच
Vallisneria natans